वोट देने की आजादी लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण मूल्य है जो व्यक्ति को अपना जन प्रतिनिधि चुनने का अधिकार देता है जिसमें वोट डालने का निर्णय लेने और सरकार चुनने के लिए स्वतंत्रता प्रदान करती है। पर वर्तमान परिस्थिति में क्या वोट और वोटर सुरक्षित है। फिर कैसी आजादी और कौन सी आजादी का पर्व हम मना रहे है जिसके सपने में भगत सिंह का फासी और गांधी का सत्याग्रह के साथ करोड़ों देश प्रेमियों का बलिदान, त्याग, तपस्या, संघर्स से निकला आजाद भारत जिसमें बाबा साहब अबेडकर का संविधान जो वोट डालने का अधिकार देश के हर नागरिक को जो 18 वर्ष पूरा कर लिया उस वोटर की वोट चोरी करके इन फरेबी लुटेरों ने देश और लोकतंत्र की अस्मिता को तार तार कर दिया है ।
लोकतंत्र में वोट चोरी करना और सरकार बनाना लोकतंत्र की हत्या है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है पर जिस तरह सरकार के इशारे पर नाच रही है उससे चुनाव आयोग के विश्वनीयता पर सवाल खड़े करता है। हर वोटर को हमारा संविधान यह अधिकार प्रदान करता है कि वह स्वतंत्र रूप से अपना वोट दे बिना दबाव और भय के अपना जनप्रतिनिधि चुने। अगर चुनाव में जनप्रतिनिधि ही वोट चोरी का खेल खेलने लगे तब तो वोटर के साथ विश्वास घात हुआ ना इस विश्वास घात से वोटर को बचाने के लिए चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना बहुत जरूरी है। चुनाव आयोग जिस तरह से खिलवाड़ कर रही है वह भारत जैसी सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश में बड़ा दुःख और दुर्भाग्य का विषय है। इस तरह से वोटर का लोकतंत्र और संविधान से भरोसा उठ जाएगा और फिर लोकतांत्रिक देश में जनता का अधिकार जनप्रतिनिधियों द्वारा छीन कर हमें पुनः राजतंत्र की ओर ले जाने का यह एक कुप्रयास है। इसे रोकने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा वोट चोरी करने वाले लोगों का अहिंसात्मक और मुखर होकर विरोध करने की जरूरत है । नहीं वह दिन दूर नहीं जब हम इन सामंतवादियों के हाथ की कठपुतली बन जाएंगे और लोकतंत्र की गरिमा समाप्त हो जाएगी और एक आजाद देश में गुलाम नागरिक बनकर रह जाएंगे। अभी भी समय है हम एकजुट होकर अपना आवाज बुलंद करें जिससे लोकतंत्र पर मंडरा रहे इस खतरे से देश और स्वयं को बचाएं रखने के लिए एक साथ मिलकर वोट चोरी का प्रतिकार करें।
धन्यवाद
शिवकांत
राष्ट्रीय संयोजन समिति
राष्ट्रीय युवा संगठन
